🔱 दस महाविद्याओं की आठवीं शक्ति

माँ बगलामुखी

पीताम्बरा — स्तंभन, विजय और दिव्य शक्ति की देवी

माँ बगलामुखी
✦ परिचय

माँ बगलामुखी — पीताम्बरा देवी

माता बगलामुखी हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। 'पीताम्बरा' के नाम से विख्यात यह देवी शत्रुओं के नाश, वाक्-स्तंभन (शत्रु की बोलने की शक्ति रोकने) और समस्त बुरी शक्तियों से भक्तों की रक्षा करने के लिए जानी जाती हैं।

माँ का सम्पूर्ण स्वरूप पीले रंग से अलंकृत है — पीले वस्त्र, पीले आभूषण और पीत कमल पर आसीन। उनकी पूजा मुख्यतः कानूनी विवादों में विजय, शत्रु बाधा से मुक्ति और मानसिक शक्ति प्राप्ति के लिए की जाती है।

🔱 आठवीं महाविद्या
💛 पीताम्बरा स्वरूप
⚔️ शत्रु नाशिनी
🛡️ स्तंभन देवी
📖 नाम का अर्थ

'बगलामुखी' — शब्द का रहस्य

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शब्द-व्युत्पत्ति

'बगला' शब्द संस्कृत के 'वल्गा' या 'वक्त्र' का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है मुख या चेहरा'मुखी' का अर्थ है — उस मुख को नियंत्रित करने वाली। अतः बगलामुखी का अर्थ है "शत्रु के मुख को स्तंभित करने वाली देवी।"

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पीताम्बरा क्यों?

माँ का सम्पूर्ण स्वरूप पीले रंग में है — पीत वस्त्र, पीत पुष्प, पीत आभूषण। हल्दी माँ की प्रिय सामग्री है। पीला रंग शक्ति, विजय, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है। इसीलिए इन्हें 'पीताम्बरा' भी कहते हैं।

✦ दस महाविद्याएँ

माँ बगलामुखी — आठवीं महाविद्या

हिंदू शक्ति परंपरा की दस प्रमुख महाविद्याएँ

काली
तारा
त्रिपुर सुंदरी
भुवनेश्वरी
भैरवी
छिन्नमस्ता
धूमावती
🔱
बगलामुखी
पीताम्बरा
मातंगी
१०
कमला
📿 पौराणिक कथा

उत्पत्ति की दिव्य कथा

सतयुग में जब सृष्टि संकट में पड़ी, तब माँ प्रकट हुईं

०१
🌪️

भयंकर तूफान का आगमन

सतयुग में एक बार ब्रह्मांड में एक अत्यंत भयानक और विनाशकारी तूफान उत्पन्न हुआ। इस प्रलयंकारी तूफान से समस्त सृष्टि खतरे में पड़ गई। तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मच गई। स्वयं भगवान विष्णु इस प्रलय को रोकने में असमर्थ हो गए।

०२
🛕

भगवान विष्णु की तपस्या

इस प्रलय को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र (गुजरात) क्षेत्र में हरिद्रा झील — जो हल्दी के रंग वाला पवित्र सरोवर था — के किनारे घोर तपस्या प्रारम्भ की। उन्होंने भगवती की शरण ली और आदिशक्ति से प्रार्थना की कि माँ बगलामुखी की आराधना का मार्ग दिखाएँ।

०३
🌕

माँ का दिव्य प्राकट्य

उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मंगलवार की अर्धरात्रि को देवी भगवती पीताम्बरा — माँ बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं। माँ का स्वरूप पीले रंग में दिव्यता से चमक रहा था। उन्होंने अपने दिव्य तेज से उस विनाशकारी तूफान को स्तंभित कर दिया।

०४
🌈

सृष्टि की रक्षा

माँ बगलामुखी ने अपनी असीम शक्ति से उस प्रलयंकारी तूफान को शांत कर दिया और सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा की। तभी से माँ 'स्तंभन की देवी' के रूप में पूजी जाने लगीं। प्राचीन काल से राजा, योद्धा और वर्तमान में राजनेता व साधक शत्रुओं पर विजय के लिए इनकी आराधना करते हैं।

🏹 पाण्डव एवं माँ की आराधना
का चित्र यहाँ लगाएँ
महाभारत काल
⚔️ महाभारत एवं माँ बगलामुखी

पाण्डवों को मिला
माँ का दिव्य आशीर्वाद

जब पाण्डव अपना सम्पूर्ण वैभव एवं राजपाट खो चुके थे तब वे भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए। भगवान कृष्ण — जो त्रिलोकी से परिचित थे — ने पाण्डवों को माँ बगलामुखी की आराधना का निर्देश दिया, क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने भी संकट में माँ की आराधना से विजय पाई थी।

भगवान के आदेश को सहर्ष स्वीकार कर पाण्डवों ने एक ऐसे स्थान की खोज की जहाँ स्वर्गिक शांति हो। वे लखुन्दर (लक्ष्मणा) नदी के तट पर वर्तमान नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) के स्थान पर पहुँचे और माँ बगलामुखी की घोर तपस्या की।

माँ भगवती बगलामुखी की कृपा एवं आशीर्वाद के कारण ही पाण्डव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए। माँ की कृपा के बिना यह विजय असम्भव थी।

🏹 महाराजा युधिष्ठिर 🛕 नलखेड़ा स्थापना 🌊 लखुन्दर नदी तट ⚔️ महाभारत विजय
🌸 स्वरूप वर्णन

माँ बगलामुखी का दिव्य स्वरूप

शास्त्रों में वर्णित माँ के अलौकिक रूप का विवरण

माँ बगलामुखी स्वरूप
🌕

पीत वर्ण

माँ का सम्पूर्ण स्वरूप पीले रंग में है — पीत वस्त्र, पीत आभूषण, पीत माला।

🪷

पीत कमल आसन

माँ पीले कमल पर विराजमान हैं जो दिव्यता और पवित्रता का प्रतीक है।

🌙

चंद्र मुकुट

माँ के मस्तक पर चंद्रमा का मुकुट सुशोभित है जो शीतलता और कृपा का प्रतीक है।

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जीभ-स्तंभन मुद्रा

एक हाथ से असुर मदन की जीभ खींचती हैं — बुरी वाणी को नियंत्रित करने का प्रतीक।

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गदाधारिणी

दूसरे हाथ में गदा धारण किए हैं जो शत्रुओं के नाश और शक्ति का प्रतीक है।

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हल्दी प्रिय

हल्दी माँ को अत्यंत प्रिय है। पूजा में हल्दी, पीले पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

🛕 सिद्ध पीठ

माँ बगलामुखी के प्रमुख मंदिर

देश भर में स्थित माँ के चमत्कारी एवं ऐतिहासिक सिद्ध पीठ

🛕 नलखेड़ा मंदिर की फ़ोटो
मध्य प्रदेश

श्री बगलामुखी माता मंदिर, नलखेड़ा

आगर मालवा जिले में स्थित यह मंदिर द्वापर युगीन है। इसकी स्थापना महाभारत में विजय हेतु भगवान कृष्ण के निर्देश पर पाण्डवों (महाराजा युधिष्ठिर) ने लखुन्दर नदी तट पर की थी। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर 3000 ईसा पूर्व का है। माँ की मूर्ति स्वयंभू मानी जाती है।

⭐ स्वयंभू मूर्ति 📅 द्वापर युगीन
🛕 दतिया मंदिर की फ़ोटो
मध्य प्रदेश

श्री बगलामुखी मंदिर, दतिया

दतिया में स्थित यह मंदिर एक प्रमुख सिद्ध पीठ है जहाँ दूर-दूर से भक्त अनुष्ठान के लिए आते हैं। यहाँ दस महाविद्याओं की प्रमुख देवी धूमावती एवं माँ बगलामुखी का चमत्कारी मंदिर है। छत्रपति शिवाजी द्वारा प्रतिष्ठित रतनगढ़ की काली माता की मूर्ति भी यहाँ स्थित है।

⭐ सिद्ध पीठ 🙏 विशेष अनुष्ठान
🛕 बनखंडी मंदिर की फ़ोटो
हिमाचल प्रदेश

माता श्री बगलामुखी देवी, बनखंडी

कांगड़ा जिले में धौलाधार पर्वतमाला के बीच स्थित यह मंदिर एक प्रमुख शक्ति स्थल है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस पावन धाम में माँ का दिव्य स्वरूप अत्यंत मनोरम एवं शक्तिशाली है। पर्वतीय क्षेत्र में स्थित होने से यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा अद्वितीय है।

🏔️ धौलाधार ⭐ शक्ति स्थल
🙏 उपासना विधि

माँ बगलामुखी की
पूजा एवं उपासना

माँ बगलामुखी को 'स्तंभन की देवी' माना जाता है। प्राचीन काल से राजा, योद्धा और वर्तमान में राजनेता एवं साधक अपने शत्रुओं एवं विरोधियों पर विजय के लिए इनकी आराधना करते हैं।

💛
पीले वस्त्र धारण करें

पूजा में पीले कपड़े पहनें, पीले आसन पर बैठें।

🌿
हल्दी का उपयोग

माँ को हल्दी अत्यंत प्रिय है। पीले पुष्प एवं हल्दी अर्पित करें।

📿
मंत्र जाप

माँ के मूल मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। मंगलवार विशेष फलदायी है।

🕯️
दीप एवं धूप

घी का दीपक और धूप जलाकर माँ की आरती करें।

📅
विशेष तिथियाँ

मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि और माँ बगलामुखी जयंती पर विशेष पूजा करें।

🪔 माँ की पूजा की फ़ोटो
💛 हल्दी अभिषेक
🕯️ आरती की फ़ोटो
🙏 माँ का मूल मंत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय
बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा

सरल मंत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखी नमः

इस मंत्र का श्रद्धा एवं विश्वास के साथ नियमित जाप करने पर शत्रु बाधा से मुक्ति, मानसिक शांति, वाक्-शक्ति में वृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मंगलवार को विशेष रूप से माँ की उपासना शुभ फलदायी मानी जाती है।

⚔️ शत्रु नाश
🏛️ कानूनी विजय
🧠 वाक्-शक्ति
🛡️ बुरी शक्तियों से रक्षा
☮️ मानसिक शांति
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माँ पीताम्बरा धाम में
माँ के दर्शन करें

N.H. 139, Kanpa, Patna — बिहार में स्थित माँ पीताम्बरा धाम में आकर माँ बगलामुखी की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करें। प्रतिदिन दर्शन, पूजा एवं भंडारे का लाभ उठाएँ।

☬ जय माँ पीताम्बरा ☬

माँ बगलामुखी की दिव्य कृपा सभी भक्तों पर सदैव बनी रहे। माँ आपके जीवन से सभी बाधाओं, भय एवं नकारात्मक शक्तियों को दूर कर सुख, शांति, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करें।